वैरिकोसेल के लक्षण क्या हैं और इसका बांझपन से क्या संबंध है?

वैरिकोसेल के लक्षण क्या हैं और इसका बांझपन से क्या संबंध है? 



वैरिकोसेल (Varicocele) एक सामान्य पुरुष स्वास्थ्य समस्या है जिसमें अंडकोष (Testicles) को रक्त की आपूर्ति करने वाली नसें (Veins) असामान्य रूप से सूज जाती हैं या बड़ी हो जाती हैं। यह स्थिति वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins) के समान होती है जो अक्सर पैरों में देखी जाती है। वैरिकोसेल आमतौर पर बाएं अंडकोष में अधिक आम है। यह किशोरों से लेकर वयस्कों तक किसी भी उम्र के पुरुष को प्रभावित कर सकता है।

वैरिकोसेल के लक्षण क्या हैं?

अधिकांश वैरिकोसेल कोई लक्षण नहीं दिखाते हैं और इसका पता तब चलता है जब डॉक्टर नियमित शारीरिक जाँच या बांझपन मूल्यांकन के दौरान इसे महसूस करते हैं। हालाँकि, जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो वे निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. अंडकोष में भारीपन या दर्द: अंडकोष क्षेत्र में हल्का, सुस्त (dull) या तेज दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द अक्सर लंबे समय तक खड़े रहने, बैठने या शारीरिक श्रम करने के बाद बढ़ जाता है, क्योंकि इससे नसों में रक्त का जमाव बढ़ जाता है।

  2. बैग ऑफ वर्म्स (Bag of Worms) अनुभूति: अंडकोष की थैली (Scrotum) पर सूजी हुई, मुड़ी हुई नसें महसूस या देखी जा सकती हैं। छूने पर यह अनुभव छोटे कीड़ों के गुच्छे (Bag of Worms) जैसा होता है।

  3. सूजन: प्रभावित अंडकोष की थैली में सूजन आ सकती है।

  4. लेटने पर राहत: दर्द या भारीपन अक्सर पीठ के बल लेटने पर कम हो जाता है, क्योंकि इस स्थिति में रक्त का बहाव बेहतर होता है।

  5. वृषण शोष (Testicular Atrophy): वैरिकोसेल से प्रभावित अंडकोष का आकार छोटा (सिकुड़ना) हो सकता है, जिसे वृषण शोष कहा जाता है।

वैरिकोसेल का बांझपन से संबंध

वैरिकोसेल पुरुष बांझपन के सबसे पहचान योग्य और उपचार योग्य कारणों में से एक माना जाता है। यह सामान्य पुरुष आबादी के लगभग 15% को प्रभावित करता है, लेकिन बांझपन से जूझ रहे पुरुषों में यह दर बढ़कर 40% तक पहुँच जाती है।

वैरिकोसेल सीधे शुक्राणु उत्पादन (Sperm Production) और गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जिससे बांझपन हो सकता है। इसका मुख्य कारण निम्नलिखित है:

1. अंडकोष का बढ़ा हुआ तापमान (Elevated Testicular Temperature)

शुक्राणु का स्वस्थ उत्पादन शरीर के सामान्य तापमान से लगभग 2 से 3 डिग्री सेल्सियस कम तापमान पर होता है। वैरिकोसेल में, नसें सूज जाती हैं और रक्त का जमाव होता है, जिससे अंडकोष के आस-पास का तापमान बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ तापमान अंडकोष के लिए हानिकारक होता है और शुक्राणु उत्पादन की प्रक्रिया (Spermatogenesis) को बाधित करता है।

2. शुक्राणु की गुणवत्ता और मात्रा पर प्रभाव

तापमान बढ़ने और रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण, वैरिकोसेल शुक्राणु के निम्नलिखित पहलुओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है:

  • शुक्राणुओं की संख्या में कमी (Low Sperm Count): शुक्राणु उत्पादन की दर कम हो जाती है।

  • शुक्राणु की गतिशीलता में कमी (Reduced Motility): शुक्राणु की गति करने की क्षमता घट जाती है, जिससे वे अंडे तक नहीं पहुँच पाते।

  • शुक्राणु की संरचना में विकृति (Poor Morphology): शुक्राणु का आकार और संरचना असामान्य हो जाती है।

  • ऑक्सीडेटिव तनाव (Oxidative Stress) में वृद्धि: वैरिकोसेल से रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) का उत्पादन बढ़ जाता है, जिससे शुक्राणु डीएनए (DNA) को क्षति पहुँचती है। यह क्षति गर्भधारण और स्वस्थ भ्रूण के विकास में बाधा डाल सकती है।

निष्कर्ष:

हालांकि वैरिकोसेल वाले हर पुरुष को बांझपन नहीं होता, लेकिन यदि कोई जोड़ा एक साल (या महिला साथी 35 से अधिक होने पर छह महीने) से गर्भधारण करने की कोशिश कर रहा है और पुरुष में वैरिकोसेल के लक्षण या जोखिम कारक मौजूद हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है। वैरिकोसेल का उपचार (आमतौर पर सर्जरी या एम्बोलाइज़ेशन) अक्सर शुक्राणु की गुणवत्ता और गर्भावस्था दर में महत्वपूर्ण सुधार कर सकता है।

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